लोकसभा 2019 : हाल ही में भाजपा छोड़ने वाले नेताजी पूर्णिया से कांग्रेस से टिकट पाने के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार

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आम चुनावों में टिकट के लिए अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना कोई नई बात नहीं है। हमारे लोकतंत्र में यह खेल वर्षों से चला आ रहा है लेकिन अगर टिकट पाने की लालसा में आप लोकतंत्र की मर्यादा और सिद्धांतों को ताक पर रखकर किसी भी सीमा तक जाने को तैयार रहें वैसी स्तिथि से न ही आप समाज का भला कर पाएंगे न ही उस दल का जिसके लिए आप आलाकमानों की चरणवंदना कर टिकट हासिल करने में लगे है।

बिहार की राजनीति में बेहद ही महत्वपूर्ण माने जाने वाले पूर्णिया लोकसभा सीट पर इस बार कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। महागठबंधन में पूर्णिया सीट कांग्रेस के खाते में लगभग जाती दिख रही है। आपको याद होगा मीडिया के सामने एक पूर्व सांसद सिद्धांतो की दुहाई देते हुए भाजपा के कूचे से बाहर निकले थे । पूर्णिया की राजनीति पर नज़र रखने वाले सियासी पंडितो ने तो यह भी कहा था कि पूर्व सांसद महोदय ने बड़ी चालाकी वैसे समय में अपनी पार्टी छोड़ी है जब यह तय है कि एनडीए की और से पूर्णिया लोकसभा सीट पर जदयू ही चुनाव लड़ेंगे। जानकार तो यह भी बताते है पूर्व सांसद साहब ने पहले ही हांथ वालों (Congress) से डील कर भगवा पार्टी का साथ छोड़ा है। हालाँकि सबसे दिलचस्प बात यह है कि अभी तक नेताजी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तक नहीं ली है बावजूद इसके उनके समर्थक पूरे पूर्णिया में नेताजी को कांग्रेस का लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर चुके है।

कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं जब से लोकसभा चुनावों की रणभेरी बजी है तब से पूर्व सांसद साहब बिहार कांग्रेस के आलानेताओं के आवभगत में दिन-रात लगे हैं। चर्चा तो यह भी है कि अगर आवभगत से बात नहीं बनी तो लोकतंत्र की सीढ़ी चढ़ने के लिए अर्थतंत्र का भी नेताजी सहा ले सकते हैं।

क्या है पूर्णिया का सियासी गणित

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