खत्म हुआ वनवास, रणजी खेल बिहार दोहरायेगा इतिहास

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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को 17 साल बाद रणजी ट्राॅफी और अन्य टूर्नामेंट में खेलने की स्वीकृति दे दी है। एपेक्स कोर्ट ने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन को इस साल होनेवाली रणजी ट्राॅफी और अन्य क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की स्वीकृति दे दी है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और न्यायाधीश ए. एम. खानविलकर और डी वाई चंद्रचूढ वाली पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि बिहार को पिछले कई वर्षों से रणजी ट्राॅफी जैसे टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गयी। पीठ ने कहा कि बिहार को क्रिकेट खेलनी चाहिए। यह आदेश क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा की अंतरिम याचिका के बाद आया है, जिन्होंने सुनवाई की मांग की थी और जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की तीसरी सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले प्रदेश से अनुचित बर्ताव किया जा रहा है। उसे रणजी व अन्य क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका नहीं दिया जा रहा है। पीठ ने कहा, अंतरिम कदम के तहत बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) को रणजी ट्राॅफी और इस तरह की अन्य प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने के लिये योग्य माना जाना चाहिए और इस अदालत के आदेश के बाद चुनी गयी बीसीए को इसका प्रभारी होना चाहिए।

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वर्ल्ड कप तक खेला जा चुका है बिहार में

एक जमाने में बिहार के मोइनुल हक स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले जाते थे। 1996 के वर्ल्ड कप में यहां केन्या और जिंबाब्वे के बीच मैच खेला गया था, जबकि यहां दो अंतरराष्ट्रीय मैच और खेले गये। वहीं, पहला अंतरराष्ट्रीय मैच यहां 15 नवंबर, 1993 को जिंबाब्वे और श्रीलंका के बीच खेला गया था, जिसमें श्रीलंका को 55 रनों से जीत मिली थी।

क्यों नहीं खेल पा रहा था बिहार

झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में क्रिकेट तो नहीं खेली गयी, पर क्रिकेट की राजनीति होती रही। पुराने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अलावा दो एसोसिएशन यहां और खोल दिये गये। एबीसी यानी एसोसिएशन ऑफ बिहार क्रिकेट और सीएबी यानी क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार। और करीब 15 वर्षों तक इन तीनों संघों ने खुद को असली बनाने के चक्कर में जमकर राजनीति की और खिलाड़ियों के कैरियर से खेला। यही कारण था कि पिछले 17 सालों में एक भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बिहार से नहीं निकला और जो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे भी उन्हें बंगाल (सबा करीम) और झारखंड (इशान किशन) से खेलना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा सकती है कि बिहार के खिलाड़ी एक बार फिर पहले रणजी और फिर टीम इंडिया में जगह पाकर बिहार का नाम रोशन करेंगे।

चल रहा खरीद फरोख्त का खेल

हालांकि, दो साल पहले जब कोर्ट के आदेश के बाद बीसीए का चुनाव हुआ, तो उम्मीद जगी कि अब बिहार में क्रिकेटरों का भला होगा। पर नवनिर्वाचित अधिकारियों में फिर से राजनीति शुरू हो गयी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। कई जिलों के अधिकारियों और सचिवों ने ये आरोप लगाये, कि उनके बच्चों के साथ अनदेखी हो रही है, तो कुछ ने हेमन ट्रॉफी और अन्य टूर्नामेंट में सेलेक्शन के लिए अधिकारियों द्वारा पैसे लेने का आरोप भी लगाया।

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