एक चिट्ठी जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार की नीति पर खड़े किये सवाल

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अभय पाण्डेय / नई दिल्लीः इस देश के विकास में भ्रष्टाचार और अनियमितता सबसे बड़ा रोड़ा रहा है। लगभग साढे तीन साल पहले इसी भ्रष्टाचार अनियमितता को मुद्दा बना कर BJP सत्ता में आई और इसके मुखिया मोदी दुनिया के सामने एक मिसाल बन गए। आज केंद्र के साथ देश के कई प्रदेशों में BJP पूरी मजबूती के साथ सरकार बना चुकी है। लेकिन कहा गया है न “चीनी की चाशनी में भी करेला अपना स्वभाव नहीं बदलता” तो शायद भ्रष्टाचार और अनियमितता फैलाने वाले कुछ लोग धीरे-धीरे हीं सही इस सरकार में भी अपना हुनर दिखाने लगे हैं।

रक्षा मंत्रालयऐसे हीं भ्रष्टाचार को उजागर करती एक चिठ्ठी 6 नवंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय को भी मिली है। जिसका खुलासा राजस्थान पत्रिका ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। PMO को यह चिट्ठी सोलापुर महाराष्ट्र के पूर्व कांग्रेसी सांसद डीएम सादुल द्वारा भेजी गई है। चिट्ठी में वर्णित सभी बातें रक्षा मंत्रालय के कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट (CGDA) वीना प्रसाद से जुड़ी है। जिनका काम रक्षा बजट के इस्तेमाल में गड़बड़ी रोकना है।

वीना प्रसाद
फाइल फोटो

पत्र में CGDA वीना प्रसाद पर पद का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पत्र में लिखा गया है कि प्रसाद ने अपने पद के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए डायरेक्टर जनरल रि-सेटलमेंट (DGR) के जरिये अपने पति मेजर जनरल (RETD) वीएन प्रसाद की कम्पनी को कोल इंडिया लिमिटेड से ठेका दिलाया है। इसके अलावे अपने पति के काम से सम्बंधित जानकारी छुपाने सहित कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। साथ हीं भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पर भी सवाल खड़े किये गए हैं।

रक्षा मंत्रालयफिलहाल PMO ने इस चिट्ठी को कार्रवाई के लिए DGR के समक्ष भेज दिया है। लेकिन इसे विडंबना हीं कहेंगे क्योंकि PMO ने इस चिट्ठी जिस DGR के पास भेजा है, वो खुद CGDA वीना प्रसाद के अधीन आता है। अब आप खुद हीं अंदाजा लगाइए जांच की दिशा और दशा क्या होगी। हालांकि इस बाबत जब CGDA से बात की गई और पूछा गया की DGR के समक्ष जो मामला आया है, वो आपके पति से जुड़ा है जो आपके अधीन आता है तो आपने अब तक इस पर क्या कार्रवाई की है। जवाब में उनहोने कहा कि मेरे अधीन कई विभाग आते जिनमें DGR भी एक है। साथ हीं उन्होने कहा कि मेरा और मेरे पति दोनों का रास्ता अलग है। हम एक दूसरे के काम में हस्तक्षेप नहीं करते।

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