जब टॉयलेट के बहाने सेमिनार छोड़ लापता हुए लालू यादव…

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अभय पाण्डेय / पटना: लालू यादव के ख़ास अंदाज को बयां करता ये किस्सा तकरीबन 32 साल पुराना है। तब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे और बिन्देश्वरी दुबे बिहार के वजीर-ए-आला की कुर्सी पर आसीन थे। उस दौरान सोवियत रूस में वहां की हुकूमत ने युवाओं के मसले पर एक बड़े सेमिनार का आयोजन किया था। दुनिया भर से कई मुल्कों के सियासी नौजवानों को उस प्रोग्राम में शिरकत करने का मौक़ा मिला था। हिन्दुस्तान के सभी प्रान्तों से विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के युवा विधायक भी सरकारी खर्चे पर रूस गए थे। उस वक्त राजद सुप्रीमो लालू यादव लोकदल (ब) के एमएलए हुआ करते थे। उस सेमिनार में बिहार से लोकदल (ब) की नुमाइंदगी लालू यादव ने हीं की थी।

सोवियत रूस में तमाम देशों के अतिथियों को ‘सेवेन स्टार’ होटल में ठहराया गया था। होटल के प्रत्येक कमरे में दो लोगों के रहने की व्यवस्था थी। लालू यादव ने यूपी की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में मशहूर इलाहाबाद के कांग्रेसी नेता सुभाष त्रिपाठी के साथ रूम शेयर किया था। सुभाष त्रिपाठी अपने छात्र जीवन में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के सचिव हुआ करते थे। यूनिवर्सिटी में उन दिनों सुभाष त्रिपाठी का खासा दबदबा हुआ करता था। उनके प्रभाव के मद्देनजर हीं उन्हें इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली एक प्रसिद्ध पत्रिका समूह में सुरक्षा अधिकारी की नौकरी मिली थी।

बहरहाल, सेमिनार के दिन सभी मेहमानों को नियत समय पर आयोजन स्थल पहुँचना था। सभी मेहमान एक बस में सवार होकर आयोजन स्थल पहुंचे। सेमिनार में पहुंचे वक्ताओं को बारी-बारी से बोलने के लिए मंच पर बुलाया जा रहा था। एक-एक कर सभी लोग गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। जब लालू यादव के बोलने की बारी नजदीक आई तो उन्होंने त्रिपाठी से ठेठ भोजपुरिया लहजे में पूछा- ‘ऐ बाबा हम टॉयलेट से आवत बानी, बड़ी जोड़ से झाड़ा लागल बा।’ इतना कहने के साथ हीं लालू यादव हॉल से बाहर निकल गए। इधर त्रिपाठी को लगा कि लालू 10-15 मिनटों में शौच से निवृत होकर लौट आयेंगे। लेकिन यह क्या? लालू यादव को कई बार मंच पर आने के वास्ते पुकारा गया, लेकिन कहीं उनका अतापता नहीं था।

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शौच करने गए लालू वापस फिर सेमिनार में नहीं आए और अंततः सेमिनार ख़त्म हो गया। सेमिनार ख़त्म होने के बाद सभी प्रतिनिधि बस से अपने-अपने होटल लौट चले। त्रिपाठी जैसे हीं अपने कमरे में घुसे, अवाक रह गए। दरअसल सेमिनार से लापता हुए लालू यादव पहले से हीं अपने कमरे में मौजूद थे और टीवी देखने में मशगूल थे। लिहाजा, लालू यादव को वहां देखकर भौचक हो चुके त्रिपाठी ने लालू यादव से पूछा- ‘आप यहां?’

त्रिपाठी की बातों को सुनते हीं लालू यादव ने जोरदार ठहाका लगाया और पुनः चालू हो गए- ‘बाबा हमारा फर्राटेदार अंग्रेजी बोले ना आवेला… एही से बहाना कर के निकल गइनी… हम कौनो सेमिनार-ओमिनार में भाग लेवे थोड़े ना आइल बानी… हम त इ सोवियत रुसवा घूमे आइल बानी… इ यूथ पर भाषण देहला से का मिले वाला बा…’ यह कहते हीं दोनों ठहाके मार कर हँसने लगे। इस घटना को अब वर्षों गुजर गए हैं, लेकिन इस किस्से को याद करके कुछ लोग आज भी हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं।

नोट: हरदिल अजीज लालू यादव के ख़ास अंदाज को बयां करती ये कहानी एक अन्य सूत्र के हवाले से प्रस्तुत की गई है।

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