हरतालिका तीज 2018 : जाने हरतालिका तीज व्रत मुहूर्त और पूजन विधि

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हरतालिका यानी तीज यह पर्व सुहाग का प्रतिक है इस दिन महिलाएं अपने पति के लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती है इस वर्ष यह त्योहार 12 सितंबर यानी आज मनाई जा रही है। हरितालिका दो शब्दों से बना है, हरित और तालिका। हरित का अर्थ है हरण करना और तालिका अर्थात सखी। हर वर्ष यह पर्व भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। जिस कारण इसे तीज कहते है।

शुभ मुहूर्त
इस बार पूजा करने की तिथि 12 सितंबर को है। सूर्योदय के बाद से शाम के 6:46 मिनट तक पूजा की जा सकेगी।

पुराणों में बताया गया है कि हरतालिका तीज का व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने रखा था।

पिता के यज्ञ में अपने पति का अपमान देवी सती सह न सकीं। उन्‍होंने खुद को यज्ञ की अग्नि में भस्‍म कर दिया। अगले जन्‍म में उन्‍होंने राजा हिमाचल के यहां जन्‍म लिया और पूर्व जन्‍म की स्‍मृति शेष रहने के कारण इस जन्‍म में भी उन्‍होंने भगवान शंकर को ही पति के रूप में प्राप्‍त करने के लिए तपस्‍या की। देवी पार्वती ने तो मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और वह सदैव भगवान शिव की तपस्‍या में लीन रहतीं। पुत्री की यह हालत देखकर राजा हिमाचल को चिंता होने लगी। इस संबंध में उन्‍होंने नारदजी से चर्चा की तो उनके कहने पर उन्‍होंने अपनी पुत्री उमा का विवाह भगवान विष्‍णु से कराने का निश्‍चय किया। पार्वतीजी को जब यह पता लगा कि उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्‍णु से कराना चाहते हैं तो उनके मन को बहुत ठेस पहुंची। उन्‍होंने अपनी सखियों से कहा कि वह शिवजी के अलावा किसी और से कतई विवाह नहीं करेंगी। पार्वतीजी के मन की बात जानकर उनकी सखियां उन्‍हें लेकर घने जंगल में चली गईं। इस तरह सखियों द्वारा उनका हरण कर लेने की वजह से इस व्रत का नाम हरतालिका व्रत पड़ा। पार्वतीजी तब तक शिवजी की तपस्‍या करती रहीं जब तक उन्‍हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्‍त नहीं हुए।

इस दिन लगभग हर सुहागन महिलाएं शंकर-पार्वती की बालू या मिट्टी की मूर्ती बनाकर पूजन करती है। घर को स्वच्छ करके तोरण-मंडप आदि सजाया जाता है। एक पवित्र चौकी पर शुद्ध मिट्टी में में गंगाजल मिलाकर शिलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती व उनकी सखी की आकृति बनाई जाती है। तत्पश्चात देवताओं का आवाहन कर षोडशोपचार पूजन किया जाता है। इस व्रत का पूजन पूरी रात्रि चलता है। प्रत्येक पहर में भगवान शंकर की पूजन-आरती होती है।

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री 

इस त्योहार को लेकर महिलाओं में बेहद उत्साह रहता है।  कुछ दिन पहले से हीं तैयारी में जुट जाती हैं। कपड़ा-लत्ता और गहनों के अलावें पूजा में प्रयुक्त होने वाले कई अन्य चीज को लेकर बाजारों में भी गहमा गहमी बढ़ सी जाती है। सुहाग की वस्तुओं के अलावें जो अन्य जरुरी समाग्री हैं वो इस प्रकार हैं। गीली मिट्टी या बालू रेत, बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल, आंकड़े का फूल, मंजरी, जनैव, वस्त्र व सभी प्रकार के फल एंव फूल पत्ते आदि। पार्वती मॉ के लिए सुहाग सामग्री-मेंहदी, चूड़ी, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, बाजार में उपलब्ध सुहाग आदि। श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, दही, चीनी, दूध, शहद व गंगाजल पंचामृत के लिए।

व्रत के नियम

हरतालिका तीज का व्रत निर्जला किया जाता है। यानी पूरा दिन, पूरी रात और अगले दिन सूर्योदय के पश्‍चात अन्‍न और जल ग्रहण किया जाता है।-यह व्रत कुंवारी कन्‍याएं और सुहागिन महिलाएं रखती हैं।-इस व्रत को एक बार प्रारंभ करने के पश्‍चात छोड़ा नहीं जाता।-यदि कोई महिला खराब स्‍वास्‍थ्‍य के चलते यह व्रत नहीं रख पा रही है तो एक बार उद्यापन करने के पश्‍चात फलाहार के साथ यह व्रत रह सकती है।-हरतालिका व्रत में रात में सोया नहीं जाता है बल्कि पूरी रात प्रभु का भजन कीर्तन करना शुभ माना जाता है।

गणेश चतुर्थी 13 को

वहीं गणेश चतुर्थी व्रत 13 सितंबर को है़। बुधवार शाम 6.39 बजे चतुर्थी लग जायेगी, जो गुरुवार शाम 5.47 बजे तक रहेगी। इसके साथ  रवियोग और यायीजय योग भी रहेगा।

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