देश के वो राजनेता जो कह गए 2017 में अलविदा

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साल 2017 में भारत ने अनेक शख्सियतों को खो दिया। कई महान नेता भारत की राजनीति को  सूना कर गए। इन सभी के जाने से  पूरा भारत रो उठा।

हम आपको ऐसी ही कई राजनीतिक हस्तियों के बारे में बताएंगे जिन्होंने 2017 मे अपनी जिंदगी की आखिरी सांस ली…

गुरदेव सिंह बादल  

गुरदेव सिंह बादल का 28 मार्च 2017 को लुधियाना के दयानंद मेडिकस कॉलेज में हुआ। वह शिरोमणि अकाली दल के नेता थे। वो फरीदकोट के पंजग्रेन सीट से विधायक थे।
 पी. शिवशंकर
भारत के पूर्व विदेश मंत्री पी. शिवशंकर का 27 फरवरी 2017 को हैदराबाद में निधन हो गया. लंबी बीमारी के चलते उनका कई महीनों से इलाज चल रहा था।

सैय्यद शहाबुद्दीन
पूर्व आईएफएस और सांसद सैय्यद शहाबुद्दीन का 82 साल की उम्र में 4 मार्च 2017 को हुआ। शहाबुद्दीन ने बाबरी मस्जिद विध्वंस का कड़ा विरोध
किया था, वो बाबरी एक्शन समिति के नेता भी थे।

रवि रे
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष रवि रे का निधन 6 मार्च 2017 को ओडिशा के कटक में हुआ। श्रीरामचंद्र भंज मेडिकल कॉलेज अस्पताल ईलाज के दौरान 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। रवि रे का जन्म ओडिशा के खुर्दा जिले के भानरागढ़ गांव में 26 नवंबर 1926 को हुआ था। शुरुवाती दौर में रवि राय छात्रसंघ के अध्यक्ष थे। लेकिन बाद रवि रे पहली बार 1989-91 तक 9वीं लोकसभा के अध्यक्ष थे। अपने दौर में वे उड़िया, हिंदी और अंग्रेजी भाषा के जानकार थे।

हाजी अब्दुल सलाम
हाजी अब्दुल सलाम का निधन 69 वर्ष की आयु में 28 फरवरी 2017 को हुआ। सलाम कांग्रेस सांसद थे और वह उच्च सदन में मणिपुर का प्रतिनिधित्व अप्रैल 2014 से कर रहे थे।

ई अहमद
पूर्व केंद्रीय मंत्री ई अहमद का 79 साल की उम्र में 1 फरवरी 2017 को निधन हो गया था। वो अहमद मनमोहन सिंह सरकार में विदेश राज्य मंत्री भी थे। ई अहमद 6 बार सांसद चुने गए और 5 बार विधायक। वो पांच साल तक केरल में राज्य के कैबिनट मंत्री भी रहे।

मुंद्रिका सिंह यादव

बिहार के जहानाबाद से विधायक तथा राजद के प्रधान महासचिव मुंद्रिका सिंह यादव का 74 साल की उम्र में 24 अक्टूबर को निधन हो गया। डेंगू से पीड़ित होने के बाद उन्हें ब्रेन हैमरेज होने पर पटना के एक बड़े अस्पताल में लाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई। श्री यादव, छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय थे। गया कॉलेज से एमए करने के बाद वो पटना सचिवालय में सिंचाई विभाग में कार्यरत थे। सन 1985 में नौकरी से रिजाइन करने के बाद वो कुर्था विधानसभा से शोषित समाज दल की टिकट पर चुनाव लड़े मगर हार गए। उसके बाद 1990 में जनता दल के टिकट पर कुर्था विधानसभा से निर्वाचित हुए और लालू मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री बनाये गए। सन 1995 में वो जहानाबाद विधानसभा से निर्वाचित हुए। साल 2000 में मुंद्रिका कुर्था से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े मगर हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद उन्होंने पार्टी बदली और वो राजद में वापस आ गये। 2004 में राजद कोटे से विधान पार्षद बने, फिलहाल 2015 में जहानाबाद से विधायक निर्वाचित हुए थे।

 

 

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