लोकसभा 2019 : बेगूसराय की चुनावी नैया पर सवार होंगे कन्हैया! बस लालू की हाँ का इंतज़ार

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देश की राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले राज्य बिहार में जिस दिन से चुनाव की तारीखों का एलान हुआ है उस दिन से नेताओं की नींद उड़ी हुयी है।

महीना मार्च का है लेकिन बहुधुर्वीय पॉलिटिकल हवाओं ने बिहार का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ा दिया है। गठबंधन की राजनीति के दौर में कई नेताओं के दिल्ली पहुचने की उम्मीद पर पलीता लग गया है। वहीँ कुछ धुरंधरो ने राजनीति में कदम रखने के साथ ही दिल्ली के मैराथन के लिए ताल ठोक दी है। इस कड़ी में सबसे पहले जिस धुरंधर का नाम सामने आया है वो हैं पूर्व JNU छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार। कन्हैया लाल झंडे के बैनर से बेगूसराय की बोकरात ज़मीन से चुनाव मैदान में उतरेंगे। कन्हैया बीते कुछ समय से लगातार बेगूसराय में सक्रिय देखे जा रहे हैं। उनकी पार्टी CPI ने क्षेत्र में संपर्क अभियान भी तेज़ किया हुआ है। बेगूसराय संसदीय सीट पर 29 अप्रैल को मतदान होना है।

बेगूसराय में सीपीआई ज़मीनी तौर पर मज़बूत पार्टी

2011 की जनगणना के मुताबिक बेगूसराय की आबादी 29,70,541 है। सीपीआई यहां जमीनी तौर पर काफी मजबूत मानी जाती है। यह बात अलग है की लम्बे समय से सीपीआई बेगूसराय से लोकसभा चुनाव नहीं जीत पायी है। 2019 में कन्हैया के लोकप्रियता और अपने ज़मीनी कैडर के बदौलत सीपीआई चुनावी नैया पार करना चाहती है। 2014 में भूमिहार बेल्ट माने जाने वाले बेगूसराय से डॉ भोला सिंह बीजेपी के टिकट पर विजयी हुए थे। डॉ भोला सिंह ने आरजेडी के प्रत्याशी तनवीर हसन को हराया था। CPI प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। यहां कुल 1,473,263 मतदाता हैं। जिनमें से 687,910 महिला और 785,353 पुरुष मतदाता हैं। इस संसदीय क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं। इनके नाम हैं- छेरिया बरियारपुर, मटिहानी, बखरी, बछवाड़ा, साहेबपुर कमल, तेघरा और बेगूसराय।

कन्हैया पर लालू करेंगे अंतिम फैसला

बिहार में एक तरफ जदयू, भाजपा, लोजपा मिलकर चुनाव लड़ रही है वहीँ दूसरी तरफ राजद कांग्रेस रालोसपा सहित अन्य छोटी पार्टियों का महागठबंधन NDA के सामने चुनाव मैदान में होगा। अभी तक सीपीआई के महागठबंधन में शामिल होने के लेकर संशय बरक़रार है। सीपीआई बेगूसराय सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर चुका है। तेजस्वी यादव बेगूसराय सीट सीपीआई को देने के पक्ष में नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार राजद सुप्रिमो के मुहर के बगैर महागठबंधन में कोई भी सीट फाइनल नहीं होने जा रहा है। अंदरखाने खबर है कि लालू सीपीआई से कन्हैया कुमार को बेगूसराय देने के पक्ष में हैं। हालाँकि CPI के आला नेताओं ने साफ कर दिया है कि वो किसी भी कीमत पर बेगूसराय सीट नहीं छोड़ेंगे।

ये जगज़ाहिर है महागठबंधन में लालू की बात काटने वाला कोई नहीं है अगर लालू की हाँ हो जाती है तो यह तय है कि कन्हैया बेगूसराय से महागठबंधन के उम्मीदवार होंगे। सर्वविदित है कि बेगूसराय को कम्युनिस्टों का गढ़ माना जाता है।

आपको बताते चलें कि केंद्र की मोदी की अगुवाई वाली NDA सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए विपक्षी दलों ने कई राज्यों में एकजुटता से गठबंधन तो बना लिया है। लेकिन टिकट बंटवारे के दौरान गठबंधन में शामिल पार्टियों में अहम् का टकराव देखने को मिल रहा है। कुछ छोटी पार्टियां जहाँ किंगमेकर की फिलिंग के साथ बड़ी पार्टियों से गलबहियां कर रहे हैं वहीँ दूसरी और बड़ी पार्टियां मोदी के लहर के दौरान अपनी खिसकी ज़मीन तलाशने में लगी हैं।

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