WHO क्या है? भारत में कहाँ है विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मुख्यालय, जानिये

WHO का पूरा नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन ( (World Health Organization-WHO) है । इसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में है।

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WHO का नाम आपने भी सुना होगा लेकिन क्या आप जानते है कि WHO क्या है ? इस संस्था के कितने सदस्य देश है ? कहाँ है WHO का मुख्यालय ? चलिए विस्तार से समझते हैं ….

WHO का पूरा नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन ( (World Health Organization) है । इसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में है। WHO का लक्ष्य “सभी के लिए, हर जगह बेहतर स्वास्थ्य” है। वर्तमान में इसके 194 सदस्य देश हैं जबकि इसकी स्थापना के समय केवल 61 देशों ने इसके संविधान पर हस्ताक्षर किये थे। वर्तमान में WHO के सदस्य देशों में 150 ऑफिस हैं और पूरे संगठन में करीब 7 हजार कर्मचारी काम करते हैं। WHO, संयुक्त राष्ट्र संघ का हिस्सा है और इसका मुख्य काम दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर रखना और उन्हें सुलझाने में मदद करना है।

World Health Organization History

चीन के स्जेमिंग स्लेज, नॉर्वे के कार्ल इवांग और ब्राजील के गेराल्ड डी पाउला सूजा ने एक ऐसे स्वास्थ संगठन के निर्माण का प्रस्ताव दिया जो दुनिया के लोगों की स्वास्थ आवश्यकताओ को संबोधित करेगा।

डब्ल्यूएचओ की स्थापना के समय इसके संविधान पर 61 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। इसकी पहली बैठक 24 जुलाई 1948 को हुई थी।

डब्ल्यूएचओ के मुख्य कार्य क्या हैं?

WHO विश्व के सभी देशों को स्वास्थ से संबंधित सहायता प्रदान करती है और दुनिया भर में स्वास्थ से संबंधित सभी पहलुओं पर अपना योगदान देती है और उनके हल निकालने के लिए महत्वपूर्ण कार्य करती है।

WHO की Service दुनिया की सभी जगह पर फैली है इसके पास दुनिया का सबसे बड़ा Blood Bank है दुनिया की कई बीमारी जैसे- हैजा, मलेरिया, चेचक, वायरस आदि बीमारियों को रोकने के लिए WHO अपना महत्वपूर्ण योगदान देती है।

WHO, वर्ल्ड हेल्थ रिपोर्ट के लिए जिम्मेदार होता है जिसमें पूरी दुनिया से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का एक सर्वे होता है। WHO मुख्य रूप से इन्फ्लूएंजा और एचआईवी जैसी संक्रामक रोग और कैंसर और हृदय रोग जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों, स्वच्छ पानी की समस्या और कुपोषण से लड़ने में विश्व की मदद करता है और उनके ऊपर रिसर्च करता हैं। वर्तमान में यह संगठन दुनिया भर में कोविड 19 महामारी से बचाओं और रोकथाम पे ध्यान दे रहा है ।

वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस है जो कि इस पद पर पहुँचने वाले पहले अफ़्रीकी हैं। ऐसा कहा जाता है कि उनको यह पद चीन की वजह से ही मिला है। डब्ल्यूएचओ के मौजूदा डायरेक्टर जनरल ट्रेड्रॉस एडोनम ने अपना पांच वर्षीय कार्यकाल 1 जुलाई 2017 को शुरू किया था।इससे पहले के घटनाक्रम में टैड्रोस ने 28 जनवरी को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने के बाद कोरोना बीमारी से लड़ने के लिए उनके प्रयासों की सराहना की थी जिसकी अमेरिका सहित विश्व के कई लोगों ने आलोचना की थी।

पिछले वर्ष यानी कि 2020 में, अमेरिकी के पूर्व राष्ट्रपति ने यह आरोप लगाया था कि यदि WHO ने चीन पर कोरोना से सम्बंधित जानकारी पूरे विश्व के साथ साझा करने के लिए दबाव बनाया होता तो अमेरिका में 20 हजार लोगों की जान नहीं जाती और विश्व में कोरोना वायरस इतना अधिक नहीं फैलता। ट्रम्प ने कहा था कि जब WHO अपने उद्येश्यों में सफल नहीं है और इसकी कार्यप्रणाली से अमेरिका को कोई फायदा नहीं है तो फिर इसको हर साल 400 से 500 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद क्यों दी जाये?

विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत (WHO and India)
  • भारत 12 जनवरी, 1948 को WHO का सदस्य बना।
  • WHO का दक्षिण-पूर्व एशिया का क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
WHO को फण्ड कैसे मिलता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन को दो तरह से फंड मिलते हैं।

1. असेस्ड कंट्रीब्यूशन

यह फंड WHO के सदस्य देश देते हैं। कौन सा सदस्य देश कितना फंड देगा, ये पहले से तय होता है और देश की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या पर निर्भर करता है। अर्थात ज्यादा बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश से ज्यादा फण्ड लिया जाता है।

असेस्ड कंट्रीब्यूशन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की ‘कोर’ फंडिंग मानी जाती है। इस फंड का इस्तेमाल संगठन अपने रोजमर्रा के ख़र्चे और ज़रूरी प्रोग्राम चलाने के लिए करता है।
इस मद में सबसे ज्यादा फंडिंग अमेरिका करता है जो कि वर्ष 2018-19 में 400 मिलियन डॉलर था और यह WHO के कुल बजट का 15% था। इसके बाद तीसरा सबसे बड़ा योगदान यूनाइटेड किंगडम का था। इसमें 2018-19 में चीन का योगदान 86 मिलियन डॉलर था।

2. वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन

यह फण्ड सदस्य देशों, बड़ी संस्थाएं और कम्पनियाँ और लोग देते हैं। जो सदस्य अपने पहले से तय असेस्ड कंट्रीब्यूशन के बाद दान करना चाहते हैं वे इस मद में अपनी इच्छा से दान कर सकते हैं।

इस वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन का इस्तेमाल संगठन उन्हीं कुछ एक विशेष कामों के लिए करती है, जिसके लिए वो फंड बता कर दिए जाते हैं।

साल 2016-17 के आँकड़ों की बात करें तो WHO के पास 80% फंड वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन से आया था। महज़ 18% ही असेस्ड कंट्रीब्यूशन के ज़रिए मिला था और बाक़ी दो फ़ीसदी अन्य सोर्स से मिले थे जिसमें सह प्रायोजकों और अन्य (फाउंडेशन, एजेंसियां, व्यक्ति और संगठन आदि) शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के उद्देश्य
  • WHO का लक्ष्य दुनिया भर के लोगों के लिए बेहतर स्वस्थ भविष्य बनाना है।
  • इसका उद्देश्य 150 से अधिक देशों में कार्यालय के माध्यम से काम करना है।
  • यह संक्रमित बीमारी जैसे- एचआईवी, इंफ्लुएंजा, और कैंसर, हृदय रोग जैसी बीमारियों से हमे सुरक्षित रखने का प्रयास करते है।
  • WHO का उद्देश्य स्वास्थ सेवाओं को मजबूत बनाने में सरकार की सहायता करना है।
  • यह प्रशासनिक और तकनीकी सेवाओं की स्थापना और रख-रखाव जैसे- महामारी, विज्ञान और सांख्यिकीय आदि सेवाएँ करना है।
  • पोषण, आवास, स्वच्छ्ता आदि कार्यो में सुधार करना।
  • स्वास्थ के लिए सभी लोगों के बीच एक सूचित सार्वजनिक राय विकसित करना।
  • वैज्ञानिक और पेशेवर समूहों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
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