जानिये सडन कार्डियक अरेस्ट क्या होता है…

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बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी की अकाल मृत्यु जब दुबई में हुयी तो मौत की वजह सडन कार्डियक अरेस्ट का आना बताया गया। आम लोगो के मन में ये सवाल उठता है कि सडन कार्डियक अरेस्ट क्या है?

दिल की धड़कन के अचानक थम जाने को लोग अक्सर हार्ट अटैक या दिल का दौरा मानने की भूल कर बैठते हैं। लेकिन यह अलग है। कार्डिएक अरेस्ट के बारे में लोगों की जानकारी सीमित है।

आइये जानते है सडन कार्डियक अरेस्ट क्या होता है

कार्डिएक अरेस्ट हमारे दिल के सिस्टम में शॉर्ट सर्किट या इलेक््रिटकल फेल्योर की तरह से होता है। जब हमारे दिल की धड़कनों के समय और गति को नियंत्रित करने वाली स्नायुओं में इलेक्ट्रिकल सिग्नल गड़बड़ा जाते हैं, तो दिल धड़कना बंद कर देता है, और ब्रेन में ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण अचानक मरीज की मौत हो जाती है।
Sudden Cardiac Arrest मृत्यु होने का एक प्रमुख कारण होता है। इसके ज्यादातर पीड़ितो को चेतावनी के कोई लक्षण भी दिखाई नही देते। व्यक्ति अचानक ही दिल के दौरे से मर जाता है, यह कभी भी आ सकता है। Sudden Cardiac Arrest का इलाज मिनटों मे नही किया जाता तो यह मृत्यु का कारण बन जाता है।

उन सब लोगों को, जिन्हें हार्ट की बीमारी है या अटैक हो चुका है, सडन कार्डिएक अरेस्ट हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि भारत में कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी सीएडी, डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मामले खतरनाक गति से बढ़ते जा रहे हैं, जिससे (खासकर शहरों में) सडन कार्डिएक अरेस्ट ने भी अपना जाल फैला लिया है। हार्ट अटैक या ब्लॉकेज की हिस्ट्री वाले मरीजों में से 80 प्रतिशत को पेसमेकर या आईसीडी लगवाना पड़ता है।

लक्षण 

नब्ज टूटती हो, दिल में जलन हो, धड़कन गड़बड़ाती हो, कभी-कभी बेहोशी आने लगे, तो कार्डिएक अरेस्ट के प्रति सावधान हो जाना चाहिए।

कार्डियक अरेस्ट आये तो क्या करें

  • अगर घर, ऑफिस या मार्केट आदि में किसी को कार्डिएक अरेस्ट होता है और उसकी सांस पूरी तरह रुक जाती है तो सबसे पहले मरीज को फौरन जमीन पर इस तरह लिटाएं कि उसकी जीभ मुंह को ब्लॉक न करे यानी सिर जमीन से हल्का-सा ऊंचा कर रखें। मरीज को हवा आने दें।
  • इसके बाद मरीज के सीने के बीचोंबीच जोर से एक मुक्का मारें। इसे कार्डिएक थंप कहा जाता है।
  • फिर फौरन सीपीआर-10 शुरू करें, जिसे इस स्थिति में सबसे बेहतरीन और सटीक इलाज माना जाता है।
  • बच्चों में सीपीआर-10 के साथ-साथ मुंह-से-मुंह मिलाकर सांस भी देना चाहिए, बशर्ते मौत की वजह डूबना आदि न हो।

हालांकि लोगों को जागरूक कर इनमें से ज्यादातर मौतों को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से अक्तूबर महीने को `सडन कार्डिएक अरेस्ट अवेयरनेस मंथ′ के रूप में मनाया जाता है।

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