#MeeToo – यौन शोषण के आरोपों से घिरे एमजे अकबर ने दिया इस्तीफा

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MeToo अभियान में यौन शोषण के आरोप में घिरने के बाद इस्तीफे का दबाब झेल रहे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने आज इस्तीफा दे दिया। उन्होंने एक लिखित बयान जारी करके अपना इस्तीफा दिया है। एमजे अकबर ने लिखा है कि उनपर जो भी आरोप लगे हैं वे सब झूठे हैं और वे इनके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ते रहेंगे। उनहोंने पीएम मोदी और सुषमा स्वराज का शुक्रिया अदा भी किया।

अकबर के मुद्दे पर लगातार भारतीय जनता पार्टी मीडिया और विपक्ष के निशाने पर थी। मोदी सरकार के मंत्री कई बार अकबर से जुड़े सवाल पूछने पर मुंह चुराते नज़र आये थे। हमलावर विपक्ष के कारण बैकफुट पर रही मोदी सरकार के लिए विदेश राज्य मंत्री का इस्तीफा फ़िलहाल राहत लेकर आया है।

वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि यह सही फैसला है और जबतक मामले की जांच नहीं हो जाती उन्हें पद पर नहीं रहना चाहिए।

किस-किस ने लगाए थे आरोप? 

सबसे पहले एशियन एज अखबार में उनकी जूनियर रही महिला पत्रकार प्रिया रमानी ने उनपर यौन शोषण का आरोप लगाया था। उसके बाद कुल 19 महिलाएं सामने आयीं और उन्होंने एमजे अकबर पर यौन शोषण का आरोप लगाया। यह सभी मामले उस वक्त के हैं जब एमजे अकबर एशियन एज के संपादक थे। जिस वक्त अकबर पर आरोप लगे वे विदेश में थे।

अकबर ने कहा मेरे खिलाफ सारे आरोप गलत

स्वदेश लौटने के बाद उन्होंने कहा कि सारे आरोप गलत हैं और उन्होंने प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का आपराधिक मामला दर्ज कराया। बावजूद इसके ‘द एशियन एज’ अखबार में काम कर चुकीं 19 महिला पत्रकार अपनी सहकर्मी प्रिया रमानी के समर्थन में आयी और केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। इन महिला पत्रकारों ने एक संयुक्त बयान में रमानी का समर्थन करने की बात कही और अदालत से आग्रह किया कि अकबर के खिलाफ उन्हें सुना जाये। उन्होंने दावा किया कि उनमें से कुछ का अकबर ने यौन उत्पीड़न किया तथा अन्य इसकी गवाह हैं।

कौन हैं एमजे अकबर
एमजे अकबर का जन्‍म 11 जनवरी 1951 को हुआ। उनका पूरा नाम मुबशर जावेद अकबर है। जानकारी के मुताबिक उनके दादा रहमतुल्‍ला धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने थे। वह हिंदू थे, लेकिन उनकी शादी मुस्लिम महिला से हुई थी। अकबर की शुरुआती शिक्षा कोलकाता बॉयज स्‍कूल में हुई, इसके बाद उन्‍होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में पढ़ाई-लिखाई की।

एमजे अकबर दुनिया के नामचीन पत्रकारों में शुमार रहे हैं। वह द टेलिग्राफ के संस्थापकों में शामिल रहे हैं। आज भले ही एमजे अकबर बीजेपी में हों, लेकिन कभी कांग्रेस में उनकी अच्छी-खासी पैठ थी। खासकर राजीव गांधी से अच्छी नजदीकी थी और उनके प्रवक्ता भी थे। 1989 में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया से सियासत में कदम रखा और बिहार के किशनगंज से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते।

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