प्रग्गनानंधा बन सकता है दुनिया के सबसे कम उम्र का चेस ग्रैंडमास्टर

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इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं है, हौसले बुलंद हो तो भाग्य का भी साथ मिलता है। तमिलनाडु – चेन्नई के 11 साल के प्रग्गा उर्फ़ प्रग्गनानंधा सबसे कम उम्र के चेस ग्रैंडमास्टर बन सकतें हैं। शतरंज को बुद्धिमानो का खेल माना जाता है और इस खेल में अभी तक प्रग्गनानंधा ने अपने चाल से जीत ही हासिल की है।

Image source- chessbase

इतनी कम उम्र होने के बावजूद प्रग्गनानंधा बहुआयामी प्रतिभा के धनी हैं। बीते अक्टूबर में  उन्होंने पैराग्वे के ग्रैंडमास्टर Axel Bachmann को न सिर्फ़ 18 मूव्स में हराया था, बल्कि उसे मास्टर्स चैम्पियनशिप से इस्तीफ़ा देने पर भी मजबूर कर दिया।  इसके बाद उनके दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बनने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो ये उनके और भारत लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हो सकती है।

प्रग्गनानंधा चैस ग्रैंडमास्टर बनने के दहलीज़ पर खड़े हैं। प्रग्गनानंधा अपने सपने को पूरा करने और भारत को एक गौरवशाली क्षण देने से महज़ 16 महीने दूर हैं। हालांकि, उन्हें अभी रूस के Sergey Karjakin का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए काफ़ी Elo Points की ज़रूरत है। Karjakin 12 साल 7 महीने में ग्रैंडमास्टर बने थे।

Youngest grandmasters in history

No.
 Player
Nat.
years
mths
days
born
GM
FIDE
1
 Sergey Karjakin
UKR
12
7
0
1990
2002
2
 Parimarjan Negi
IND
13
4
22
1993
2006
3
 Magnus Carlsen
NOR
13
4
27
1990
2004
4
 Bu Xiangzhi
CHN
13
10
13
1985
1999
5
 Richard Rapport
HUN
13
11
15
1996
2010
6
 Teimour Radjabov
AZE
14
0
14
1987
2001
7
 Ruslan Ponomariov
UKR
14
0
17
1983
1997
8
 Wesley So
PHI
14
1
28
1993
2007
9
 Etienne Bacrot
FRA
14
2
0
1983
1997
10
 Jorge Cori
PER
14
2
0
1995
2009

source-chessbase.com

 

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान प्रग्गा ने कहा कि वे 12 साल के होने से पहले ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल कर लेना चाहतें हैं। अगस्त से पहले मैं 5-6 टूर्नामेंट खेलूंगा, अभी मेरी रेटिंग 2,455 (Elo points) है। अच्छा खेलने पर मेरी रेटिंग अच्छी होगी, मेरी रेटिंग प्वाइंट्स 2500 तक पहुंच सकती है। ग्रैंडमास्टर स्टेट्स के लिए मुझे 2600+ प्वाइंट्स लाने होंगे।

प्रग्गनानंधा की माँ हर टूर्नामेंट में उनके साथ रहतीं हैं। प्रग्गा की माँ कहतीं हैं – उनका बेटा हमेशा अपने विरोधियों की चाल को समझने में लगा रहता है। इसके लिए वह देर तक यूट्यूब वीडियो और कुछ अन्य वेबसाइटों को देखता रहता है। साथ हीं अपने कोच R. B. Ramesh से टैक्टिक्स को लेकर डिस्कशन भी करता है। प्रग्गा की बहन वैशाली खुद एक इंटरनेशनल मास्टर हैं। शतरंज की चालों को समझने के लिए प्रग्गा अपने बहन की भी मदद लेता है।

प्रग्गा के खेल को देखकर हम कह सकतें हैं जो अपने कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखते हैं, वो ही अक्सर मंजिल पर पहूँचते है।

Story Source – Indiatimes

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