सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खोला गया सबरीमाला का कपाट, महिलाओं के प्रवेश पर विरोध जारी

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दिए जाने के बाद पहली बार केरल के सबरीमाला मंदिर का कपाट खोल दिया गया । इसी के साथ श्रद्धालू रात 10.30 बजे तक प्रार्थना कर सकेंगे। पांच दिन की मासिक पूजा के बाद यह 22 अक्टूबर को फिर बंद हो जाएंगे।

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पहले मंदिर में केवल 12 साल से कम और 60 साल से अधिक आयु वर्ग की महिलाएं ही प्रवेश कर सकती थीं। लेकिन अब सभी आयु वर्ग की महिलाएं अब मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत तो मिल गई लेकिन इसको लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है। विरोध में उतरे लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं जिनका कहना है कि ये धर्म और आस्था का मामला है, मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश नहीं मिलना चाहिए। विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर हिंसा देखने को मिली, जिसका शिकार मीडियाकर्मी भी हुए। कई गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की गई। उधर, पुलिस ने निलक्कल और पम्बा में विरोध कर रहे त्रावणकोर देवासम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सहित 50 लोगों को हिरासत में लिया है।


सबरीमाला

वहीं विपक्ष केरल सरकार से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग कर रहा था लेकिन सरकार ने साफ कर दिया था कि पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की जाएगी। केरल सरकार ने कहा है कि हम कोर्ट के आदेश को लागू करेंगे।

तमाम विरोध प्रदर्शनों के बीच नेताओं के बयान भी सामने आ रहे हैं।

चलिए देखते हैं किसने क्या कहा

  •  मुख्यमंत्री पी. विजयन ने विरोध कर रहे लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी श्रद्धालुओं का रास्ता रोकेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि सरकार पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हर हाल में लागू करेगी। 
  • केरल के मंत्री, वीएस सुनील का कहना है कि भाजपा और आरएसएस डबल स्टैंड ले रहे हैं। एक तरफ भाजपा से जुड़े पांच वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की ताकि सभी आयु की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश मिल सके। वहीं दूसरी तरफ भाजपा फैसले के खिलाफ हो रही लड़ाई का नेतृत्व कर रही है। अब भाजपा इसे कानून और व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।
  • भाजपा नेता उदित राज का कहना है, ‘दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है और यह काफी दिलचस्प भी है। ‘मुझे गुलाम बनाओ, मेरे साथ असमान रूप से व्यवहार करो, हम पुरुषों से कम हैं’, महिलाएं ही महिलाओं को रोक रही हैं। इसमें क्या बात है? मुझे नहीं पता कि इस देश में क्या हो रहा है।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह उनकी निजी राय है, राजनीतिक नहीं।
  • भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सबरीमाला मामले पर बोलते हुए कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है, लेकिन अब आप कह रहे हैं कि यह हमारी परंपरा है। तीन तलाक भी इसी तरह की परंपरा है, जब इसे खत्म कर दिया गया तो सब लोग प्रशंसा कर रहे थे। वही हिंदू अब सड़कों पर आ गए हैं।’ 
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