सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को किया बाहर, एसोसिएट राज्यों को होगा फायदा

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लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को मानने के लिए बीसीसीआई द्वारा नहीं लागू किये जाने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को उनके पद से हटा दिया है। इससे खेल जगत में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। हालांकि, सभी की चिंता अब यह है कि भारत में सर्वाधिक चहेते इस खेल का नया मुखिया कौन होगा। खेल जानकारों की चिंता इसलिए भी है कि क्रिकेट हर भारतीय के दिल में बसता है और इस कारण बीसीसीआई अन्य देशों के क्रिकेट बोर्ड और अपने देश के सभी खेल फेडरेशन से अमीर है। यही कारण है कि अन्य खेलों की अपेक्षा इस खेल का अधिकारी बनने के लिए पक्ष और विपक्ष के नेताओं में उठा-पटक होते रहती है। शरद पवार, अनुराग ठाकुर, राजीव शुक्ला आदि कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने राजनीति से ज्यादा क्रिकेट से जुड़े रहने के कारण अपनी पहचान बनाई है। अब ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद क्रिकेट के सबसे अमीर बोर्ड की सत्ता किसके हाथ जायेगी, यह फैसला होने तक खबरों और कयासों का बाजार गर्म रहेगा।

अनुराग ठाकुर ने जब बीसीसीआई अध्यक्ष की गद्दी संभाली थी (फाइल फोटो)

बोर्ड संशय में हैं कि अपने पांच उपाध्यक्षों में से किसे वह कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नामित करे। फिलहाल डीडीसीए के अनुभवी अधिकारी सीके खन्ना तीसरी बार उपाध्यक्ष बने हैं और सबसे वरिष्ठ हैं। वे मध्य क्षेत्र से उपाध्यक्ष हैं। हालांकि, डीडीसीए के पर्यवेक्षक सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मुकुल मुद्गल ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सौंपी रिपोर्ट में खन्ना को ‘घातक प्रभाव वाला’ करार दिया है।

अनुराग के तत्काल प्रभाव से हटने के बाद कोर्ट के फैसले के अनुसार फिलहाल सबसे वरिष्ठ उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव मिलकर बोर्ड का कामकाज देखेंगे। अनुभव और वरिष्ठता की बात की जाये, तो इस रेस में सबसे आगे हैं डीडीसीए के सीके खन्ना. खन्ना तीसरी बार उपाध्यक्ष बने हैं और पांचों में सबसे वरिष्ठ हैं. 64 साल के खन्ना के अलावा पश्चिमी क्षेत्र के टीसी मैथ्यू, पूर्वी क्षेत्र के गौतम रॉय, उत्तरी क्षेत्र के एमएल नेहरू और दक्षिण क्षेत्र के जी गंगाराजू हैं। भारतीय क्रिकेट बोर्ड में नौ साल पूरा करने से खन्ना अभी ढाई साल दूर हैं और 70 साल की सीमा में भी 6 साल बाकी है। इस पर फैसला नौ जनवरी को फाली नरिमन और गोपाल सुब्रमण्यम द्वारा कोर्ट को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट के बाद होगा।

सौरभ गांगुली भी रेस में


सौरभ गांगुली भी रेस में

2016 में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के प्रमुख सौरभ गांगुली भी इस रेस में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले भी जगमोहन डालमिया के रूप में बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में सीएबी का वर्चस्व रहा था। अब गांगुली भी यह पदभार संभालने के लिए उत्सुक होंगे। गांगुली को बंगाल टाइगर भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को कई बार संकट से निकाला है। अब वे यह जिम्मेवारी भी संभालने को तैयार होंगे।

होंगे सकारात्मक बदलाव, बिहार सहित कई एसोसिएट राज्य संघों को होगा फायदा

सुप्रीम कोर्ट के कड़े फैसले के बाद क्रिकेट में जो भी बदलाव होगा, उसका सबसे बड़ा असर उत्तर-पूर्व के राज्यों को होगा, जो राज्य बीसीसीआई के भेदभाव के शिकार हैं। बिहार, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय सहित कई नॉर्थ-इस्ट के राज्यों को बीसीसीआइ ने एसोसिएट का दर्जा दे रखा है, लेकिन सिफारिशों को मानने के बाद इन राज्यों के क्रिकेट संघों को अब पूर्ण सदस्यता मिल जायेगी। इससे ये राज्य भी बीसीसीआई के बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा ले सकेंगे। खास कर फंड को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इन राज्यों के साथ खासा भेदभाव करता आ रहा था। पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद मुंबई-गुजरात की तरह इन राज्यों को भी करोड़ों रुपये के फंड मिलेंगे, जिससे यहां पर क्रिकेट तेजी से पैर पसारेगा।

आंध्रप्रदेश सिफारिशें लागू करने को तैयार

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीसीसीआइ अध्यक्ष और सचिव को हटाये जाने के बाद बोर्ड के सीनियर उपाध्यक्ष गोकाराजू गंगराजू ने सोमवार को साफ तौर पर कहा कि उनका आंध्र क्रिकेट संघ तुरंत प्रभाव से लोढ़ा समिति के सुझाव लागू करेगा। गंगराजू ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि यह उच्चतम न्यायालय का फैसला है। आंध्र क्रिकेट संघ का अध्यक्ष होने के नाते हम तुरंत प्रभाव से सारे सुझाव लागू करेंगे। यदि हमें विश्राम की अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) में जाना पड़े, तो हम जायेंगे। यह क्रिकेट के लिए अच्छा संकेत है।

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