सड़क दुर्घटना में पत्रकारों की मौत कहीं हत्या को हादसा बनाने की कोशिश तो नहीं

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भोजपुर: जिले के गड़हनी में दैनिक भास्कर के पत्रकार नवीन निश्चल और एक समाचार पत्रिका के प्रखंड संवाददाता विजय सिंह की आज साम सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसा आरा-सासाराम स्टेट हाईवे स्थित नहंसी गाँव के पास हुआ। हादसे के वक्त निश्चल और विजय एक साथ बाइक पर बैठ कर अपने गाँव बगवां जा रहे थे कि तभी पीछे से आ रही एक स्कॉर्पियो ने दोनों को रौंद दिया। दोनों की मौत घटना स्थल पर हीं हो गई। स्कार्पियो गड़हनी के पूर्व मुखिया हरशु की बताई जा रही है।

सड़क दुर्घटना में पत्रकारों की मौत हादसा है या हत्या ? लोगों की माने तो ये हादसा नहीं हत्या है जिसे एक पूर्व प्रायोजित षडयंत्र के तहत अंजाम दिया गया है। इसके पीछे गड़हनी के पूर्व मुखिया हरशु का हाथ होना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि घटना से पूर्व किसी ख़बर को लेकर उक्त मुखिया ने नवीन को जान से मारने की धमकी दी थी। मुखिया द्वारा धमकी मिलने के बाद नवीन ने अपने हत्या की आशंका भी जताई थी। घटना से कुछ देर पहले भी मुखिया के परिजनों और नवीन के बिच गड़हनी बाजार पर नोक झोक हुई थी।

सड़क दुर्घटना में पत्रकारों की मौत हादसा है या हत्या ? इस घटना के बाद स्थानीय लोग गुस्से में हैं। गुस्साए लोगों ने सड़क से गुजरने वाली कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है। वहीं इस घटना को लेकर पत्रकारों के बीच भी काफी रोष है। पत्रकारों का कहना है कि पुलिस जल्द से जल्द मामले का उद्भेदन करे और दोषीयों को गिरफ्तार करे। हालांकि पुलिस अभी इस घटना को एक सड़क हादसे के रूप में हीं देख रही है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पूरी तरह अलर्ट है।

सड़क दुर्घटना में पत्रकारों की मौत हादसा है या हत्या ? बहरहाल इन दोनों की मौत हत्या है या हादसा ये तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन पिछली कुछ घटनाओं पर नजर दौडाएं तो बिहार में पत्रकारों को सुरक्षा राम भरोसे है। यहाँ कलम की धार पर पाबंदी लगाने खातीर लगातार प्रहार होते रहे हैं। कभी पत्रकारों को जान मारने की धमकी दी जाती है तो कभी जानलेवा हमले करवा दिए जाते हैं। कुछ पत्रकारों को तो मौत के घाट भी उतार दिया गया।

पेश है ऐसी हीं कुछ ख़ास घटनाएं

सड़क दुर्घटना में पत्रकारों की मौत हादसा है या हत्या ? 1 नवम्बर 2007 को बाहुबली विधायक अनंत सिंह के गुर्गों ने पत्रकारों पर हमला बोल दिया था। पत्रकार अनंत सिंह पर लगे रेप के एक मामले पर उनकी प्रतिक्रया जानने गए थे। NDTV के रिपोर्टर प्रकाश सिंह और कैमरामैन हबीब अली को तो विधायक ने अपने सरकारी आवास पर हीं कई घंटों तक बंधक बना लिया था। कैमरामैन हबीब किसी तरह से एमएलए के चंगुल से भागने में कामयाब रहे और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बाद में भारी मशक्कत के बाद प्रकाश को आनंत के चंगुल से मुक्त कराया जा सका। इस हमले में कई पत्रकार बुरी तरह जख्मी हो गए थे।

सड़क दुर्घटना में पत्रकारों की मौत हादसा है या हत्या ? 13 मई 2016 को सिवान में बीच सड़क पर पत्रकार राजदेव रंजन का जिस्म गोलियों से महज इस लिए छलनी कर दिया गया कि उन्होने राजद के बाहुबली नेता सह पूर्व सांसद सहाबुद्दीन के फरमान की अनदेखी करते हुए उनके खिलाफ न्याय संगत खबर प्रेषित की।

सड़क दुर्घटना में पत्रकारों की मौत हादसा है या हत्या ? 27 मई 2016 की रात को अपनी ड्यूटी ख़त्म कर दफ्तर से घर जा रहे पत्रकार राकेश सिंह पर पटना में जानलेवा हमला हो गया। हालांकि राकेश ने किसी तरह खुद को मौत के मुंह से बचा लिया, लेकिन कई दीनो तक वे उस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पाए थे।

सड़क दुर्घटना में पत्रकारों की मौत हादसा है या हत्या ? 12 नवम्बर 2016 की अहले सुबह सासाराम में एक दैनिक अखबार के संवाददाता धर्मेन्द्र सिंह की गोली मार कर हत्य कर दी गई। आगे इस हत्या को नया मोड़ देते हुए आपसी रंजिश का परिणाम बता दिया गया।

राजद सुप्रीमो लालू यादव भी भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल को लेकर एक टीवी पत्रकार पर भड़क गए थे और मारने तक की धमकी दे डाली थी। RJD के बरारी विधायक नीरज यादव ने तो हद हीं कर दिया था। उन्होने एक निजी हिंदी दैनिक के पत्रकार को अपने खिलाफ खबर लिखने पर ना शिर्फ माँ-बहन की गालियां दी बल्कि गोली मार देने की धमकी तक दे डाली थी।

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