नीतीशजी यकीन मानिए आपका इतिहास किताबों में नहीं लोगों के दिलों पर लिखा जाएगा

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अभय पाण्डेय: नीतीशजी बधाई हो कागजी तौर पर आपकी शराबबंदी सफल रही। उम्मीद है दहेज़ मुक्ति के क्षेत्र में भी आप नया कृतिमान गढ़ेंगे। कामना करता हूँ लोगों का समर्थन आपको ऐसे हीं मिलता रहे और एक दिन आपके सीने की चौड़ाई भी 56 इंच हो जाए। लेकिन अफ़सोस, ऐसा मैं सोचता हूँ और मेरे जैसे कुछ और होंगे जो ऐसा सोंचते होंगे, लेकिन पूरा प्रदेश ऐसा सोचे ये कोई जरूरी नहीं।

नीतीश कुमार माना की शराब की लत और दहेज की आग ने कई घरों को तबाह कर दिया है, आपके साथ शराब की वजह से जो गुजरी है तो  इस पर आपका सख्त होना लाजमी है। हमारी संवेदनाएं भी आपके साथ हैं। लेकिन इस प्रदेश में शराब और दहेज के अलावे भी कुछ बड़ी समस्याएं हैं जो सुरसा की तरह मुंह बाए घरों को निगल रही है और हर रोज गई जिंदगियों को  तबाह भी कर रही  है, जिन्हें बेकारी और बेरोजगारी कहते हैं लेकिन इन्हें लेकर तो आप इतने गंभीर नहीं दिख रहे।

नीतीश कुमारशराब और दहेज़ को लेकर आप जितने चिन्तित और गंभीर हैं कभी बेकारी और बेरोजगारी पर भी नजरें दौड़ा लीजिये नहीं तो ये आपके सारे किये पर पानी फर देगा। शराब पिने से ना तो पूरे बिहार को  शराबि कहा जा सकता है और ना तो उपहार लेने या देने से दहेज़लोभि। कई लोग शौक से पिते हैं तो कई लोग शौक से दहेज़ भी देते हैं, लिहाजा कुछ लोग होंगे जिन्हें शाराबी कहा जा सकता है कुछ लोग होंगे जिन्हें दहेजलोभी भी कहा जा सकता है। लेकिन आपने तो सब के लिए हीं पैमाना तय कर दिया।  खैर सरकार आपकी है तो पैमाना भी आप हीं तय कीजिए, लेकिन एक पैमाना बेरोजगारी और बेकारी भी तय कीजिए क्योंकि ये शौक नहीं मजबूरी है जिसने पूरी नीव हीं हिला दी है।

मानव श्रृंखलाआप शराब और दहेज़ को लेकर चाहे जितने गंभीर हो जाइए, जीतनी चर्चा बटोर लीजिये, जीतनी पीठ थपथपा लीजिये बेरोजगारी की मौजूदगी में आपकी तमाम उपलब्धि शून्य हीं रहेगा, क्योंकि आपके प्रदेश की जो आबादी है उसका एक बड़ा हिस्सा बेरोजगारी की वजह से या तो दुसरे प्रदेशों में पलायन कर चुका है या पलायन करना तय है। वजह साफ़ है आपके याहां तो रोजगार है हीं नहीं। अब ज़रा आप हीं सोचिये बिहार में तो आपने शराब पिने पर पाबंदी लगा दी लेकिन जो लोग यहाँ से बाहर हैं या जाने की फिराक में हैं, इसकी क्या गारंटी है की वो शराब से दूर रहेंगे। खैर आंशिक रूप से शराबबंदी सफल रही है क्योंकि अब ये प्रदेश में खुलेआम नहीं है। रही बात दहेज़ कि तो इसके खिलाफ पहले से हीं कड़े कानूनी प्रावधान हैं फिर भी प्रचलन ख़त्म नहीं हुआ। वजह साफ़ है दहेज़ देने वाला ना तो खुले मंच से एलान करता है ना लेने वाला। ये तो रिश्वत की तरह गुप्त तरीके से लिया जाता रहा है और उम्मीद है आगे भी लिया जाता रहेगा। इसमें तो शराब की तरह गंध भी नहीं आती जो आपकी पुलिस मुह सूंघ कर पकड़ लेगी।

मानव श्रंखलाआपने मानव श्रृंखला के माध्यम से दुनिया के सामने जिस तरह से पिछले साल शराबबंदी और इस साल दहेज़मुक्ति को लेकर लोगों का समर्थन दिखाया कभी बेरोजगारी भगाओ के नाम पर भी ऐसी मानव श्रृंखला बनावाइये यकीन मानिए आपका इतिहास किताबों में नहीं लोगों के दिलों पर लिखा जाएगा।

 

 

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