जानिए क्वाड (QUAD) क्या है, क्वाड से चीन क्यों है परेशान

‘क्वाड’ दरअसल चार देशों- भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का एक समूह है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता, कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए इन देशों ने हाथ मिलाया है ।

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जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत और अमेरिका के बीच एक बहुपक्षीय समूह का नाम है क्वाड (QUAD) । क्वाड यानी क्वाड्रीलैटरल सिक्टोरिटी डायलॉग। इसमें भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया व अमेरिका शामिल हैं। इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति की स्थापना और शक्ति का संतुलन है। इसके जरिये प्रशांत महासागर, अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया में फैले एक विशाल नेटवर्क को जापान तथा भारत के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो एबी ने क्वाड का प्रस्ताव रखा था, जिसे भारत, अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया ने समर्थन दिया। चीन इसे एक उभरता हुआ ‘एशियाई नाटो’ के रूप में देख रहा है।

क्या है ‘क्वाड’ (QUAD)?

‘क्वाड’ दरअसल चार देशों- भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का एक समूह है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता, कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए इन देशों ने हाथ मिलाया है । गौरतलब है कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ समुद्री भागों के हिस्से को हिंद प्रशांत क्षेत्र (Indo- Pacific Area) कहते हैं। वर्तमान में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 38 देश शामिल हैं, जो विश्व के सतह क्षेत्र का 44 प्रतिशत है। जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक देश के बढ़ते प्रभुत्व के कारण उत्पन्न हो रही भू-राजनैतिक और भू-रणनीतिक चिंताओं के मद्देनजर 2007 में भारत, अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्वकर्त्ताओं के साथ मिलकर रणीनतिक वार्ता के रूप में ‘क्वाड’ नामक अनौपचारिक समूह की शुरुआत की थी। वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया द्वारा इस ग्रुप से बाहर हो गया , जिसके परिणामस्वरूप ‘क्वाड’ का सिद्धान्त शिथिल पड़ गया था । वर्ष 2017 में भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने मिलकर ‘क्वाड’ को ‘क्वाड’ 2.0 के रूप में फिर से पुनर्जीवित किया था। ‘क्वाड’ मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द- कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।

क्वाड (QUAD) की ताकत

भारतीय थलसेना में करीब 22 लाख जवान हैं, जबकि नौसेना की क्षमता करीब 1.30 लाख है। वायुसेना में करीब 2.80 लाख सैनिक तैनात हैं। अर्धसैन्य बलों में तैनात सैनिकों की संख्या इससे अलग है। अमेरिका की संयुक्त सैन्य ताकत 10 लाख, जापान की 2.40 लाख व ऑस्ट्रेलिया की 60 हजार से अधिक है।

क्वाड (QUAD) के सैन्यीकरण को लेकर भारत की रणनीति

भारत ने क्वाड के सैन्यीकरण को लेकर परंपरागत रूप से अरूचि ही दिखाई है और कई मौकों पर तो क्वाड के सैन्यीकरण के मुद्दे पर विरोध भी दर्ज कराया है। भारत का कहना है कि क्वाड का उपयोग असैनिक या नागरिक मुद्दों के लिये होना चाहिये।
वर्ष 2018 में शांग्रिला डायलॉग में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत, हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को एक भौगोलिक सिद्धांत (Geographical Concept) प्रदान करता है, न कि यह कुछ देशों की विशेष रणनीति पर बल प्रदान करता है। कुल-मिलकर भारतीय प्रधानमंत्री का इशारा क्वाड की तरफ था , जिसे भारत सहित कुछ देशों ने मिलकर एक विशेष रणनीति के तहत बनाया है। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत द्वारा गुटनिरपेक्ष आंदोलन को वरीयता ना देने का यह मतलब नहीं है कि भारत किसी अन्य संगठन तंत्र का हिस्सा बनेगा। एस जयशंकर का भी इसारा क्वाड की ही तरफ था।

क्वाड के सैन्यीकरण से भारत को लाभ

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा पर जिस प्रकार का तनाव बना हुआ है , उसे देखते हुए भारत को क्वाड के सैन्यीकरण की तरफ बढ़ाना चाहिए । ऐसा भी देखा जा रहा है कि भारत की तमाम कोशिशों के बावजूद चीन लद्दाख में उस क्षेत्र को छोड़ने को राजी नहीं हो रहा है , जहां पहले दोनों देशों की सेनाएँ पेट्रोलिंग करती थीं। यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच बफर जोन का कार्य करता था। कई बैठकों के बावजूद अभी तक सीमा विवाद का हल नहीं निकल पाया है। इसलिए कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पर दबाव बनाने हेतु भारत को क्वाड पर फोकस करना चाहिये। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि क्वाड के सैन्यीकरण से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र नेविगशन सुनिश्चित होगा और इस क्षेत्र की सुरक्षा में भी इजाफा होगा क्योंकि क्वाड ग्रुप के सदस्य देशों का लक्ष्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व स्थिरता को बढ़ावा देना है। क्वाड के सैन्यीकरण से भारतीय नौसेना की क्षमता में इजाफा होगा और भारत को इस ग्रुप के माध्यम से सैन्य क्षेत्र में काफी कुछ सीखने को मिलेगा क्योंकि इस क्वाड ग्रुप अमेरिका जैसी अत्याधुनिक शक्ति शामिल है। कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि क्वॉड को ‘एशिया का नाटो’ बना दिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि क्वॉड में शामिल सभी देश अगर साथ आ जाएं तो चीनी ड्रैगन को आसानी से काबू में किया जा सकता है।

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क्वॉड ग्रुप के देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी

भारत-अमेरिका के बीच 2002 में जनरल सिक्युरिटी ऑफ मिलिट्री इन्फोर्मेशन एग्रीमेंट हुआ था। इसमें तय हुआ था कि जरूरत पड़ने पर दोनों देश एक-दूसरे से मिलिट्री इंटेलिजेंस साझा करेंगे। फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे से पहले ही भारत ने 2-6 अरब डॉलर (19 हजार 760 करोड़ रुपए) की लागत से 24 एमएच 60 आर मल्टीरोल हेलीकॉप्टर खरीदने की डील को मंजूरी दी है। इतना ही नहीं, चीन को काउंटर करने के लिए ही ट्रम्प ने 2016 में भारत को ‘डिफेंस पार्टनर’ का दर्जा दिया था। भारत-ऑस्ट्रेलिया की नौसेना हिंद महासागर में अभ्यास करती हैं, जिसे ऑसइंडेक्स (AUSINDEX) कहते हैं। भारत और जापान के बीच भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री डकैती जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मिल कर काम कर रहे हैं। इसके अलावा भारत, जापान और अमेरिका की नौ सेनाएं मालाबार में एक साथ अभ्यास भी करती हैं।

क्वाड को लेकर चीन की चिंताएं और रणनीति

चीन को लगता है कि क्वाड चीन के आसपास के समुद्र में अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहता है. क्योंकि, क्वाड इंडो-पैसिफिक स्तर पर काम कर रहा है. यह भविष्य में चीन को निशाना बना सकता है। क्वाड को लेकर चीन को लगता है कि यह एक अमेरिकी साजिश है, जिसके जरिए चीन के बढ़ते अस्तित्व को रोकने की कोशिश की जा रही है. इसलिए अब चीन ने आसियान देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना शुरू कर दिया है. चीन चाहता है कि BRI पर सभी आसियान देश एकसाथ काम करें. चीन ने क्वाड का जबाब देने के लिए एक अभ्यास अक्टूबर 2018 आसियान के बीच समुद्री अभ्यास शुरू कर चूका है। साथ हिन् चीन ने परिवहन मार्गों को आगे बढ़ाने के लिए आसियान देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं. इनमें मौजूदा आर्थिक गलियारे, चीन-थाईलैंड रेलवे, चीन-लाओस रेलवे और जकार्ता-बांडुंग हाई-स्पीड रेलवे शामिल हैं।

क्वाड के सैन्यीकरण के माध्यम से भारत चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की नीति को भी जवाब दे सकता है। जापान से लेकर अफ्रीका तक विस्तारवादी नीतियों लागू कर चीन अपनी मोतियों की माला की नीति (स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति) के तहत दक्षिण एशिया तथा हिन्द महासागर के छोटे-छोटे देशों में सामरिक एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अड्डों का निर्माण करके भारत को घेरने की लंबे समय से जीतोड़ कोशिश कर रहा है। चीन, बांग्लादेश और म्यामांर में नेवल बेस की स्थापना कर रहा है। दोनों ही देशों को चीन हथियार और अन्य साजों सामान दे रहा है।

चीन मालदीव में भारत से मात्र कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर एक कृत्रिम द्वीप बना रहा है। इसने श्रीलंका के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल के लिए लीज पर ले लिया है।इसी तरह से चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को भी नेवल बेस के रूप में विकसित कर रहा है। जानकारों का मानना है कि मलक्का स्ट्रेट में भारत और अमेरिका की नजर से बचने के लिए चीन ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल करेगा। इसी तरह से चीन कंबोडिया में भी एयर बेस और नेवल बेस बना रहा है।

चीन के पांच सूत्रीय फार्मूला –
  • BRI पर एक साथ काम करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करना
  • 5G सहित चीन-आसियान डिजिटल सहयोग को स्थापित करना
  • पूरी तरह से चीन-आसियान FTA को लागू करना
  • आचार संहिता (चीन द्वारा प्रस्तावित) की बातचीत के पाठ के आधार पर क्षेत्रीय नियमों को अंतिम रूप देना
  • संयुक्त समुद्री अभ्यास में संलग्न (अक्टूबर 2018 में चीन और आसियान के बीच पहले से ही किया गया)
    चीन ने परिवहन मार्गों को आगे बढ़ाने के लिए आसियान देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
    इनमें मौजूदा आर्थिक गलियारे, चीन-थाईलैंड रेलवे, चीन-लाओस रेलवे और जकार्ता-बांडुंग हाई-स्पीड रेलवे शामिल हैं।

गौरतलब है कि क्वाड का चीन के अलावा रूस भी विरोध करता है। आसियान के कुछ देश ‘क्वाड’ का खुलकर समर्थन करते हैं, जबकि अन्य देश चीन को नाराज नहीं करने की नीति को अपनाते हुए ‘क्वाड’ के बारे में सधी प्रतिक्रिया देते हैं।

निष्कर्ष

 क्वॉड कोई आक्रामक रवैया नहीं है, ये कुछ देशों के विचारों का मिलन है कि दुनिया नियमों और क़ानूनों से चलनी चाहिए। क्वॉड की शुरुआत एक सकारात्मक सोच के साथ हुई है।  इसमें कुछ और देशों को जोड़ने की कोशिश भी हो रही है। भारत हमेशा अन्य देशों को जोड़ने और उनके साथ बातचीत के पक्ष में रहा ह। कोविड-19 के बाद चीन की अर्थव्यवस्था और उसका दबदबा तेज़ी से बढ़ रहा है जो क्वाड देशों के लिए चिंतनीय है। कोरोना महामारी के बाद उपजे हालत से क्वाड के माध्यम से भारत को अर्थववस्था की चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है। 

Source : विभिन्न पुस्तकों और वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारियों से साभार 

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