सियासी योगी का आरक्षण योग… शर्मनाक।

0 181

एक ही हार में योगी ‘आरक्षण योग’ करने लगे। सारा दम निकल गया। उतर गए उसी नीच सियासत पर जिससे उबारने के लिए सत्ता दी गई थी। अब जब जातियों के नाम पर सियासत करने वाली सरकार ही चुननी है तो माया-मुलायम को ही आने दो। कम से कम पहले ही पता तो होता है कि आएंगे तो क्या करेंगे। कम से कम जैसे हैं, वैसे दिखते तो हैं। इन छद्म वेषधारियों के तो इतने चेहरे हैं कि समझना मुश्किल है…

आरक्षण से प्रताड़ित जातियां बस एक होकर आरक्षण पोषित सियासत के खिलाफ हो जाएं तो सब औकात में आ जाएं लेकिन यह जातियां कभी दल देखती हैं तो कभी अपने प्रिय नेता का चेहरा। अपनी मांग भी हक से नहीं बल्कि लजाते-सकुचाते हुए रखती है। उसके लिए कभी लड़ती नहीं। इसलिए इनका यह हाल है कि जो भी सत्ता में आता है इन्हें कोरे भाषणों का झुनझुना पकड़ा जाता है और इनके खिलाफ ही चाल चल जाता है। फिर भी मूर्खों की तरह ताली बजाते रहते हैं।

सुन लो सवर्णों…

और रिझो दल और नेताओं के वेश पर, इनके भाषणों पर। तुम अब भी आंखें न खोलो। इनकी करतूतें न देखो। तुम बस अपनी ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की कल्पना में जीते रहो, एक दिन आंगन में बैठने लायक जमीन नहीं बचेगी। सरकारी तो सपना ही है, निजी क्षेत्र की नौकरियां भी न मिलेंगी।

इतना तो जान ही गए हो कि इस आर्थिक जगत में बिन नौकरी मौत भी बदतर होगी, जिंदगी तो छोड़ दो। तो समझ लो कि तुम तो अपने नेता, महाराज, भगवान आदि की भक्ति कर निकल लोगे लेकिन आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा, यह भी समय निकालकर सोच लेना। अरे, जब तुम खुद अपनी संतानों का नहीं सोच पा रहे तो तुम्हारे बारे में कोई नेता क्यों सोचे? तुम तो महाराजजी लोगों की सेवा में जीवन बिताकर निकल लोगे। आगे ये महाराजजी लोग वह हाल कर देंगे कि बच्चे बड़े होकर पकौड़ा भी नहीं बेच पाएंगे। तब तुम शिकायत करने के लिए भी न होंगे, न अपनी गलतियां सुधारने के लिए।

अब से भी सोच लो। अभी से बदलो खुद को। सोचो खुद के बारे में भी क्योंकि देश की सियासत ने अब तुम्हारे बारे में सोचना छोड़ दिया है। इस खुमारी से जागो और समग्र छोड़कर अब तुम भी अपनी जाति पर उतर जाओ। तुम इस युग में योग्यता के लिए मरे जा रहे हो जहां का संविधान, सत्ता, कानून सब जाति के हिसाब से चल रहा है। अब तुम यह ट्रेंड बदल नहीं सकते इसलिए तुम भी जाति पर उतर जाओ। तुम भी अब खुद के बारे में सोचना शुरू कर दो तभी नेता भी सोच पाएंगे। नहीं तो योगी चुनोगे या भोगी।

वह आरक्षण का ही भोग लगाएगा और तुम बस टुकुर-टुकुर देखते रहना कि अपने महाराज जी हैं। लो देख लो… इस महाराज जी को भी इनके हिंदुत्व को भी। देख लो कि कैसे सत्ता में आते ही कुछ जातियों तक सिमट गया इनका हिंदुत्व। अब भी नहीं चेते तो तुम भी सिमट जाओगे। मिट जाओगे।

सियासी योगी का आरक्षण योग... शर्मनाक।
लेखक मृत्युंजय त्रिपाठी देश के जाने माने युवा पत्रकार हैं. कई बड़े समाचार पत्रों में अपनी सेवा दे चुके मृत्युंजय फिलहाल अमर उजाला में कार्यरत है।
Loading...

Subscribe to our newsletter
Sign up here to get the latest news delivered directly to your inbox.
You can unsubscribe at any time

Leave A Reply